तकनीकी प्रभाग | इस्पात मंत्रालय | भारत सरकार

You are here

मुख पृष्ठ तकनीकी विंग तकनीकी प्रभाग

तकनीकी प्रभाग

पृष्ठभूमि और संरचना

तकनीकी स्कंध, जिसका अब नामकरण तकनीकी प्रभाग किया गया है, की स्थापना संसद सदस्य श्री खाडिल्कर की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा पर 60 के दशक के उत्तरार्द्ध में की गई थी। शुरुआत के समय से तकनीकी स्कंध मुख्यतया इस मंत्रालय के विभिन्न अधिकारियों/प्रभागों/अनुभागों द्वारा माँगे गए मुद्दों पर तकनीकी सलाह और टिप्पणियाँ प्रदान करने से संबद्ध था और इसका मुख्य कार्य औद्योगिक लाइसेंसिंग आवेदनों, विदेशी सहयोग संबंधी आवेदनों तथा पूँजीगत माल, कच्चा माल, विदेशी तकनीशियनों इत्यादि को देश में लाने हेतु अनिवार्यता प्रमाणपत्र के तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन से संबंधित था।

80 के दशक के मध्य/उत्तरार्द्ध में तत्कालीन संयुक्त सचिव (श्री प्रदीप बैजल) तथा सचिव (श्री वेंकटनारायण) ने इसकी तकनीकी प्रकृति को देखते हुए सरकारी बजटीय सहायता से अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं कीस्वीकृति/समीक्षा के लिए तत्कालीन विज्ञान सलाहकार समिति (एसएसी) तंत्र के तहत अनुसंधान एवं विकास तथा इस्पात क्षेत्रीय समन्वय समिति (एसएससीसी) के अंतर्गत गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण से संबंधित कार्य सौंपा।

90 के दशक के आरंभ में भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की घोषणा की, जिसके तहत लौह और इस्पात संयंत्रों के लिए निर्धारित मानकों का अनुपालन करना अपेक्षित हो गया। ऊर्जा और पर्यावरण प्रबंधन की बोर्ड श्रेणी के अंतर्गत यह कार्य भी तत्कालीन संयुक्त सचिव (श्री खट्टर) तथा सचिव (श्री वेंकटनारायण) द्वारा तकनीकी स्कंध को सौंपा गया। वर्ष 1991-92 में लाइसेंस समाप्त करने तथा अविनियमन के बाद, औद्योगिक लाइसेंसिंग से संबंधित कार्य में काफी कमी आ गई किंतु दूसरी ओर, 1) डीजीएफटी की अग्रिम लाइसेंसिंग योजना के तहत शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए इनपुट-आउटपुट मानकों के नियतन, 2) ईपीसीजी योजना के अंतर्गत पूँजीगत माल के आयात, 3) प्रधानमंत्री ट्रॉफी, 4) राष्ट्रीय धातु विज्ञान दिवस इत्यादि से संबंधित पर्याप्त नए कार्य तकनीकी स्कंध को सौंपे गए।

तकनीकी प्रभाग की अध्यक्षता मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव के समग्र प्रशासनिक नियंत्रणाधीन एक औद्योगिक सलाहकार द्वारा की जाती है। वर्तमान में, उनके अधीन एक अपर औद्योगिक सलाहकार तथा एक सहायक औद्योगिक सलाहकार हैं। औद्योगिक सलाहकार, संयुक्त औद्योगिक सलाहकार तथा उप-औद्योगिक सलाहकार के पद रिक्त पड़े हैं।

कार्य:
तकनीकी स्कंध प्रभाग को तकनीकी प्रकृति के विभिन्न विषयों अर्थात् अनुसंधान एवं विकास, ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन, इस्पात उत्पादों का मानकीकरण एवं गुणवत्ता नियंत्रण, इस्पात क्षेत्र में सुरक्षा का संवर्धन इत्यादि के संबंध में पूर्ण विकसित सचिवालय/प्रशासनिक कार्य सौंपा गया है। तकनीकी स्कंध प्रभाग द्वारा देखे जाने वाले कार्य को दो व्यापक श्रेणियों अर्थात् सलाहकारी कार्य एवं प्रत्यक्ष (सचिवालय) कार्य में बाँटा जा सकता है, जो निम्नवत् हैं:

1. प्रत्यक्ष/प्रशासनिक कार्य: सक्षम प्राधिकारियों (जेएस/सचिव/एसएम) के अनुमोदन से मुद्दों का सीधा निपटान:

• लौह और इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास
• गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए इस्पात एवं इस्पात उत्पादों से संबंधित तकनीकी विनियम
• भारतीय लौह और इस्पात क्षेत्र में ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन
• इस्पात क्षेत्र में सुरक्षा का संवर्धन
• निर्यात संवर्धन (शुल्क मुक्त योजनाएं)
• प्रधानमंत्री ट्रॉफी तथा इस्पात मंत्री ट्रॉफी
• द्वितीयक इस्पात क्षेत्र पुरस्कार योजना
• राष्ट्रीय धातु विज्ञान दिवस पुरस्कार

1. सलाहकारी कार्य: इस्पात मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों के सभी अधिकारियों/प्रभागों/अनुभागों को तकनीकी सलाह/टिप्पणियाँ प्रदान करना:

• लोहा और इस्पात, फेरो अलॉय, रिफ्रैक्टरी उद्योग की आयोजना और विकास से संबंधित मामले (राष्ट्रीय इस्पात नीति, लोहा और इस्पात संबंधी कार्य दल, कोयला संबंधी कार्यदल इत्यादि)
• डब्ल्यूटीओ/टीबीटी से संबंधित मामले
• लोहा और इस्पात प्रोजेक्ट की आरंभिक स्थापना या पर्याप्त विस्तार के लिए प्रोजेक्ट इम्पोर्ट की स्वीकृति हेतु अनिवार्यता प्रमाण-पत्र
• उद्योग एवं संघों के प्रतिनिधित्व के संबंध में तकनीकी इनपुट
• ईंधन (कोयला, फर्नेस ऑयल, एनजी, एलपीजी इत्यादि) तथा लोहा और इस्पात उद्योग के लिए कच्चा माल/इनपुट की आवश्यकताओं को प्रमाणित करना
• लोहा और इस्पात संयंत्रों के तकनीकी-आर्थिक निष्पादन का मूल्यांकन करना
• मंत्रिमंडल नोट, अन्य मंत्रालयों के नीतिगत दस्तावेजों पर टिप्पणियाँ/इनपुट

लोहा और इस्पात क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास
भारतीय लोहा और इस्पात क्षेत्र में ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन
• द्वितीयक इस्पात क्षेत्र पुरस्कार योजना